एक घने जंगल के किनारे रामू नाम का एक गरीब आदमी रहता था। उसके पास एक प्यारी बकरी थी, जिसका नाम गुनगुन था। गुनगुन बहुत समझदार और चंचल थी। रामू उसे अपने परिवार की तरह प्यार करता था।
एक दिन गुनगुन जंगल में घास चरते-चरते रास्ता भटक गई। तभी उसकी मुलाकात जंगल के राजा शेर से हुई। शेर भूखा था और उसने बकरी को देखकर दहाड़ते हुए कहा, “आज तो मुझे स्वादिष्ट भोजन मिल गया!”
गुनगुन डर गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने कहा, “महाराज, अगर आप मुझे खा लेंगे तो आपका पेट थोड़ी देर ही भरेगा। लेकिन अगर आप मेरे मालिक रामू से दोस्ती कर लें, तो वह रोज आपको स्वादिष्ट खाना देगा।”
शेर को यह बात अच्छी लगी। वह गुनगुन के साथ रामू के घर पहुँचा। शेर को देखकर रामू डर से काँपने लगा। लेकिन गुनगुन ने सारी बात समझाई। रामू समझ गया कि शेर भूखा है, बुरा नहीं।
रामू ने शेर को खाना खिलाया। धीरे-धीरे शेर और रामू में दोस्ती हो गई। शेर जंगल के दूसरे जानवरों को भी गाँव वालों से दूर रहने को कहता था, जिससे गाँव सुरक्षित रहने लगा।
एक दिन कुछ शिकारी जंगल में आए। उन्होंने शेर को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। गुनगुन ने यह देख लिया और तुरंत रामू को खबर दी। रामू ने गाँव वालों की मदद से शेर को बचा लिया। शेर बहुत खुश हुआ और बोला, “आज से तुम दोनों मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो।”
उस दिन से बकरी, शेर और आदमी तीनों मिल-जुलकर खुशी से रहने लगे। उनकी दोस्ती पूरे जंगल में मिसाल बन गई।
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