
neelkamal_srivastava.np9d8j
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दो दोस्त थे—राहुल और अमन। दोनों एक छोटे गाँव से बड़े शहर नौकरी की तलाश में आए थे। सपनों से भरी आँखें, जेब में थोड़े पैसे और दिल में भरोसा।शहर में शुरू के दिन बहुत मुश्किल थे। एक ही कमरे में रहते, साथ खाना बनाते, साथ इंटरव्यू देते। धीरे-धीरे किस्मत ने करवट ली—अमन को एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन राहुल अभी भी संघर्ष कर रहा था।अमन ने वादा किया था, “जैसे ही मैं सेट हो जाऊँगा, तुम्हें भी अपनी कंपनी में लगवा दूँगा।” राहुल को अपने दोस्त पर पूरा भरोसा था।कुछ हफ्तों बाद कंपनी में नई भर्ती निकली। राहुल को उम्मीद थी कि अमन उसका नाम आगे बढ़ाएगा। लेकिन अमन ने अपने स्वार्थ के लिए किसी और को सिफारिश कर दी—ताकि खुद का फायदा बना रहे और कोई उसका मुकाबला न करे।राहुल को जब ये बात पता चली, तो उसका दिल टूट गया। उसे समझ आया कि शहर सिर्फ सपने नहीं देता, कभी-कभी अपने भी छीन लेता है।समय बीता… राहुल ने हार नहीं मानी। मेहनत करता रहा, और आखिरकार उसे एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई—अमन से भी बेहतर।एक दिन दोनों फिर मिले। अमन शर्मिंदा था, लेकिन राहुल मुस्कुराकर बोला—"दोस्ती में धोखा मिला, लेकिन उसी ने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखा दिया।”सीख:दुनिया में सब बदल सकता है, लेकिन मेहनत और खुद पर विश्वास कभी धोखा नहीं देते।