एक शाम दोनों भाई अपनी पुरानी कुटिया के बाहर बैठे थे।
सूरज धीरे-धीरे नदी के पीछे डूब रहा था।
मोहन ने मुस्कुराते हुए कहा—
“भैया, याद है लोग कहते थे कि इस पुरानी मशीन से हमारी जिंदगी नहीं बदल सकती?”
अर्जुन मुस्कुराया।
“उन्होंने मशीन को पुराना देखा था, लेकिन हमारे सपनों को नहीं।”