एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में एक नेक दिल किसान रहता था। उसके पास एक बहुत ही सुंदर आम का बगीचा था, जिसे उसने सालों की मेहनत से उगाया था। वह हर रोज़ सुबह जल्दी उठता और पूरे मन से अपने बगीचे की देखभाल करता।
लेकिन उसी गाँव के पास एक जंगल में एक चालाक लोमड़ी रहती थी। एक दिन उसकी नज़र किसान के बगीचे पर पड़ी। पेड़ों पर लटके रसीले आम देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। उसने मन ही मन सोचा,
"वाह! कितने स्वादिष्ट आम हैं… आज तो दावत होगी मेरी!"
उस रात, जब चारों तरफ सन्नाटा था, लोमड़ी चुपके से बगीचे में घुस गई और आम खाने लगी। वह बहुत खुश थी और सोच रही थी कि किसान को इसका पता भी नहीं चलेगा। इसके बाद वह हर रात आने लगी और पके हुए आम चुरा ले जाती।
एक सुबह जब किसान अपने बगीचे में पहुँचा, तो उसने देखा कि उसके सारे आम गायब हैं। यह देखकर वह बहुत दुखी हो गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए और वह बोला,
"हाय! मेरे सारे आम कौन चुरा गया? सालों की मेहनत बर्बाद हो गई… अब मेरे बच्चे क्या खाएंगे?"
लेकिन किसान ने हिम्मत नहीं हारी। उसने तय किया कि वह चोर को सबक जरूर सिखाएगा। उसने बगीचे में एक गहरा गड्ढा खोदा और उसे सूखे पत्तों से ढक दिया। फिर उसने उस गड्ढे के ऊपर एक पका हुआ रसीला आम रख दिया और मन ही मन बोला,
"अब देखता हूँ कितने चालाक हो तुम!"
रात होते ही लोमड़ी फिर बगीचे में आई। जैसे ही उसे आम की खुशबू आई, वह तेजी से उसकी ओर दौड़ी। लेकिन जैसे ही उसने आम लेने की कोशिश की, वह अचानक गड्ढे में गिर गई। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी,