क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि में माँ दुर्गा के केवल एक रूप की नहीं, बल्कि नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा क्यों की जाती है?
क्या इन नौ रूपों के पीछे सिर्फ अलग-अलग नाम और अलग-अलग कथाएँ हैं?
या फिर इन नौ स्वरूपों में कोई ऐसा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है, जिसे समझने के बाद नवरात्रि को देखने का हमारा नजरिया ही बदल जाए?
सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को शक्ति का स्वरूप माना गया है। लेकिन यही शक्ति कभी बेटी बनकर सामने आती है, कभी तपस्या करती हुई साध्वी के रूप में, कभी माँ बनकर अपनी संतान की रक्षा करती है और कभी अधर्म के सामने प्रचंड योद्धा बन जाती है।
माँ के ये नौ स्वरूप केवल पूजा की परंपरा नहीं हैं। इनके रूप, अस्त्र-शस्त्र, वाहन और कथाओं में अलग-अलग आध्यात्मिक संकेत दिखाई देते हैं।
आज हम इन्हीं नौ स्वरूपों की उस यात्रा को समझेंगे, जो शैलपुत्री से शुरू होकर सिद्धिदात्री तक पहुँचती है।
और शायद अंत तक आपको समझ आएगा कि नवरात्रि में माँ की पूजा केवल बाहर नहीं, भीतर की यात्रा भी है। written anything about themselves.